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Chapra Farmer News: जैविक खाद से किसानों की बड़ी बचत, 300 रुपये में तैयार हो रही एक एकड़ की खाद

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Alam Ki Khabar: छपरा के किसान कृषि विज्ञान केंद्र से प्रशिक्षण लेकर घर पर जैविक खाद तैयार कर रहे हैं। इससे खेती की लागत में भारी कमी आ रही है और फसलों की पैदावार भी बेहतर हो रही है।

छपरा, 8 जुलाई। आलम की खबर: बढ़ती खेती लागत के बीच छपरा जिले के किसान अब जैविक खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र, मांझी की पहल पर किसानों को घर पर ही जैविक खाद तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसका असर यह है कि अब कई किसान महंगी रासायनिक खाद खरीदने के बजाय गोबर, गाय का मूत्र, गुड़ और मिट्टी जैसी स्थानीय सामग्री से कम लागत में जैविक खाद तैयार कर रहे हैं। इससे खेती का खर्च घट रहा है और फसलों की पैदावार में भी सुधार देखने को मिल रहा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक एकड़ खेत के लिए जैविक खाद मात्र 200 से 300 रुपये की लागत में तैयार हो जाती है, जबकि रासायनिक खाद पर इसी क्षेत्र में 10 से 15 हजार रुपये तक खर्च करना पड़ता है। जीवामृत और घनजीवामृत जैसी जैविक खाद लगभग 15 दिनों में तैयार हो जाती है और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी सहायक मानी जाती है। छपरा जिले के खानपुर निवासी किसान रणजीत सिंह इस बदलाव की मिसाल बनकर सामने आए हैं। उन्होंने प्रशिक्षण लेने के बाद रासायनिक खाद खरीदना लगभग बंद कर दिया है और अब अपनी खेती के लिए पूरी तरह घर में तैयार जैविक खाद का उपयोग कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे खेती की लागत में बड़ी कमी आई है और उत्पादन भी संतोषजनक मिल रहा है। रणजीत सिंह से प्रेरित होकर आसपास के कई किसान भी जैविक खेती की तकनीक अपना रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों का मानना है कि यदि अधिक किसान प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ते हैं तो खेती की लागत कम होने के साथ-साथ मिट्टी की गुणवत्ता और पर्यावरण संरक्षण में भी सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे।

प्राकृतिक खेती भविष्य की जरूरत

बढ़ती खेती लागत के दौर में जैविक खेती किसानों के लिए एक व्यवहारिक विकल्प बनती जा रही है। यदि प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और बाजार की बेहतर व्यवस्था मिले तो प्राकृतिक खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी अहम भूमिका निभा सकती है।

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